Thursday, 28 August 2014

Z+ सुरक्षा ?

कितनी अजीब परिस्थिति है हमारे भारतवर्ष की जिस देश में एक लाख (1,00,000) लोगो पर मात्र 130  पुलिस वाले हों ! उस देश में एक दंगा आरोपित की सुरक्षा के लिए 36 NSG कमांडो की दीवाल ! वाक़ई ये दुखद है !
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अच्छे दिन आएंगे ?

अच्छे दिन आएंगे ! इस नारे का खुमार मतदाताओं पर कुछ इस कदर चढ़ा कि बीजेपी ने वो ऐतिहासिक जीत का स्वाद चखा जिसकी वो खुद भी उम्मीद नहीं कर रही थी ! अच्छे दिन मतलब क्या ! क्या मोदी ये कह रहे थे कि मेरे आते ही सुखा पड़ेगा , रेल किरायों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी कि जाएगी , पेट्रोल/डीजल के दाम आसमान छुएंगे और अब टमाटर आपको देख कर नहीं बल्कि आप टमाटर के दाम को देखकर लाल हो जाएंगे ....दरअसल मोदी कुछ भी कहना चाह रहे हों पर जनता ने उनकी बातो का मतलब कुछ और ही समझा था ! वो बावली जनता समझ बैठी कि अच्छे दिनों के आने का मतलब मंहगाई का कम हो जाना और गरीबी का दूर हो जाना था ! वैसे नारो कि वजह से जीत का मज़ा चखने वाली बीजेपी अकेली पार्टी नहीं है , लगभग हर चुनाव में इनका इस्तेमाल किया जाता है ! अच्छे दिन आएंगे ! ये नारा किसी नारे का  प्रतिबिम्ब है ! जी हाँ याद है 1971 का लोकसभा चुनाव जिसमे अबकी बार करारी हार का सामना करने वाली पार्टी कांग्रेस ने  भी कुछ इसी तरह कि जीत का स्वाद चखा था ! वो नारा स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने दिया था कि " वो कहते हैं कि इंदिरा हटाओ और मै कहती हूँ कि गरीबी हटाओ " ! मैंने " गरीबी हटाओ " और " अच्छे दिन आएंगे " के नारे को एक दूसरे का प्रतिबिम्ब इस लिए कहा क्यूंकि जनता के लिए दोनों का मतलब एक ही है ! गरीबी के जाल से निकलना ही उनके लिए सबसे अच्छे दिनों कि शुरुआत है ! 
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