2015 के दिल्ली चुनाव में जो हुआ वो ऐतिहासिक है की नहीं इसको लेकर लम्बी लम्बी बहसें तो होती ही रहेंगी लेकिन इस चुनाव ने सन्देश दिया है की वोटर को आकर्षक विज्ञापन,धार्मिक समर्थन और जोशीले भाषण से ज्यादा उसके स्थानीय मुद्दे,पार्टी की विश्वसनीयता और नेता की सादगी आकर्षित करती है ! लहर का रुख पलटा या पलट रहा है ये तो पता नहीं लेकिन कल तक जिसे हम भक्त कहने लगे थे उसने इस चुनाव में एक वोटर की तरह सोचकर वोट किया !भाजपा की नकारात्मक बयानबाजी ने AK-49 को AK-67 बनाने में अहम योगदान प्रदान किया ! ये जीत सिर्फ अरविन्द केजरीवाल की जीत नहीं बल्कि गोडसे पर गांधी के आदर्शो की जीत है ! अरविन्द केजरीवाल पर स्याही फेंकी गयी,थप्पड़ बरसाए गए और उनके लिए भद्दे शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया लेकिन अरविन्द एक पल के लिए भी घबराये नहीं उन्होंने सत्य और अहिंसा के बल पर जनता के दिल में एक ऐसी छवि बना ली जिसे लोगो ने खूब पसंद किया !
कांग्रेस की इस हालत का ज़िम्मेदार शायद उसका अपना नेतृत्व रहा जो कभी लवली को सामने रखता था तो कभी अजय माकन को पेश कर देता था ! कुछ इसी तरह की गलती बीजेपी ने भी की ये भी पहले तो गोयल,जगदीश मुखी,हर्षवर्धन और सतीश उपाध्याय को सामने रख रहे थे और फिर पैराशूट से किरण बेदी को मैदान में ले आये ! किरण बेदी का इस तरह पार्टी में आना और फिर मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश किया जाना न सिर्फ जनता को अखरा बल्कि उनकी अपनी पार्टी व कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया ! इसके बाद किरण बेदी के बरताव , प्रधानमंत्री मोदी के 10 लाख वाले सूट और अमित शाह का 15 लाख वाली बात को चुनावी जुमला बताना इत्यादि ने बीजेपी को इस हालत पर पंहुचा दिया की वो नेता विपक्ष के लायक भी नहीं बची ! आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को दिल्ली से पोछ कर साफ़ कर दिया और बीजेपी को एक कोने में समेट कर रख दिया ! अब कांग्रेस ठन्डे बस्ते में चली गयी है और बीजेपी भी अपना आधार खोती नज़र आ रही है ! अरविन्द केजरीवाल ने राजनीति के इन दिगज्जो को हराकर राजनीति में लोगो के विश्वास को फिर से जगा दिया है ! अब अरविन्द लोगो के प्रति कितने खरे उतरते है इसके बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी ! हमे भी अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को जज करने से पहले उन्हें भी कुछ वक़्त देना होगा ! देखते हैं अभी तक जिस अरविन्द की तुलना "नायक" फिल्म के अनिल कपूर से की जा रही थी क्या वो भी वैसे ही "नायक" बन कर उभरेंगे या भारतीय राजनीतिक परंपरा का अनुशरण करते हुए चुनाव के बाद जनता और उनके विकास को भूल जाएंगे ! ये सब जानने के लिए इंतज़ार करना होगा तब तक आप 15 लाख और वाईफाई के सिग्नल चेक करते रहिये !
-सलमान अली
कांग्रेस की इस हालत का ज़िम्मेदार शायद उसका अपना नेतृत्व रहा जो कभी लवली को सामने रखता था तो कभी अजय माकन को पेश कर देता था ! कुछ इसी तरह की गलती बीजेपी ने भी की ये भी पहले तो गोयल,जगदीश मुखी,हर्षवर्धन और सतीश उपाध्याय को सामने रख रहे थे और फिर पैराशूट से किरण बेदी को मैदान में ले आये ! किरण बेदी का इस तरह पार्टी में आना और फिर मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश किया जाना न सिर्फ जनता को अखरा बल्कि उनकी अपनी पार्टी व कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया ! इसके बाद किरण बेदी के बरताव , प्रधानमंत्री मोदी के 10 लाख वाले सूट और अमित शाह का 15 लाख वाली बात को चुनावी जुमला बताना इत्यादि ने बीजेपी को इस हालत पर पंहुचा दिया की वो नेता विपक्ष के लायक भी नहीं बची ! आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को दिल्ली से पोछ कर साफ़ कर दिया और बीजेपी को एक कोने में समेट कर रख दिया ! अब कांग्रेस ठन्डे बस्ते में चली गयी है और बीजेपी भी अपना आधार खोती नज़र आ रही है ! अरविन्द केजरीवाल ने राजनीति के इन दिगज्जो को हराकर राजनीति में लोगो के विश्वास को फिर से जगा दिया है ! अब अरविन्द लोगो के प्रति कितने खरे उतरते है इसके बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी ! हमे भी अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को जज करने से पहले उन्हें भी कुछ वक़्त देना होगा ! देखते हैं अभी तक जिस अरविन्द की तुलना "नायक" फिल्म के अनिल कपूर से की जा रही थी क्या वो भी वैसे ही "नायक" बन कर उभरेंगे या भारतीय राजनीतिक परंपरा का अनुशरण करते हुए चुनाव के बाद जनता और उनके विकास को भूल जाएंगे ! ये सब जानने के लिए इंतज़ार करना होगा तब तक आप 15 लाख और वाईफाई के सिग्नल चेक करते रहिये !-सलमान अली
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