Wednesday, 11 March 2015

सरहद की दीवार

अभी कुछ दिन पहले वाघा-अटारी बार्डर पर थे । देशभक्ति उफान पर थी इधर से हम हिंदुस्तान जिंदाबाद चिल्ला रहे थे उधर से वो पाकिस्तान जिंदाबाद चीख रहे थे । तभी न जाने क्यों एक अंग्रेज पर नज़र गई जो एक बार हमें चिल्लाते हुए देखता है अौर फिर उन्हें चीखते हुए देखता है अौर फिर पास ही खड़ी अपनी गर्लफेंड के कान मे कुछ कहता है अौर दोनो खिलखिलाकर हँसने लगते है । मुझे शर्म महसूस होती है अौर निगाहें झुक जाती है ।
              यहाँ आकर लगता है कि ये दोनो देश कितने पास होकर भी कितने दूर हैं । 
                                                                                                           -सलमान अली 

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