Monday, 29 September 2014

अमेरिका वाले मोदी जी !




प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आपने 9/11 के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त कि इससे मुझे बड़ी तसल्ली हुई ! यकीन हो गया कि आप भी इंसान को इंसान ही समझते है न की "कुत्ते का पिल्ला" ! लेकिन एक सवाल भी सामने आ गया मेरे क़ि आपकी यही संवेदना तब कहाँ चली जाती है जब बाबरी मस्जिद कि शहादत कि बात आती है । आपका ये मोम सा दिल तब पत्थर क्यूँ बन जाता है जब 2002 के गुजरात दंगो की बात आती है । क्या इन दंगो में मरने वालो के प्रति आपके दिल में कोई प्रेम नही , कोई सहानुभूति नही । आप अब भारत के प्रधानमंत्री हो इसीलिए आपसे गुज़ारिश करूंगा कि हो सके तो थोडा सा यही दर्द ,प्यार और संवेदना उनके लिये भी बचा लाना जिन्हें आज तक इन्साफ नही मिला ।
                       उनके लिए जिनके सामने उनकी माँ,बहन,बेटी के साथ बलात्कार किया गया ! इन्साफ उनके लिए जिनकी आँखो के सामने उनके पति,बाप,बेटों को मौत के घाट उतार दिया गया !
--------------------सलमान अली------------------

Wednesday, 17 September 2014

यही बापू का सच्चा रास्ता है।

सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलने वाले को समझ लेना चाहिए कि यह रास्ता शहीद होने का रास्ता है। सत्य और अहिंसा के रास्ते पर जो कोई इफेक्टिव( परिणामात्मक), काम करेगा वह एक न एक दिन मारा जाएगा। सत्य और अहिंसा का रास्ता दुनिया नहीं सह सकती। बापू जी की जीवनी को देखिये, उन्हें जब दूसरा कोई मारने के लिए तैयार नहीं होता था तो वे अपनी आत्माहुति देने पर तुल जाते थे। अपने मारे जाने के मौके पैदा कर देते थे। अभी मानवता की इतनी प्रगति नहीं हुई है कि सत्य और अहिंसा के रास्ते पर मज़बूती से चलने वाला भी न मारा जाए। आपको अपनी आहुति देने के मौके पैदा करने होंगे। आपकी किस्मत अच्छी होगी तो नहीं मारे जाएंगे। लेकिन शायद मारे जाने पर आप की दैवीशक्ति सफल होगी। अगर कांग्रेस ने कुर्बानी कारास्ता छोड़ दिया तो उसका काम न चलेगा। कुर्बानी का रास्ता गांधी जी दिखा गए हैं। उस हुतात्मा के रास्ते पर हम को चलना है। अगर हम में दम है तो गांधीजी के नाम पर नहीं बिकेंगे। उनकी जो चीज़ हम को जंचेगी उसे लेंगे, जो नहीं जंचेगी उसे छोड़ देंगे। लेकिन सत्य और अहिंसा की राह हरगिज़ न छोड़ेंगे। यही बापू का सच्चा रास्ता है।

                                                      - आचार्य जे बी कृपलानी (14 मार्च 1948, यह हिस्सा मैंने आचार्य कृपलानी मेमोरियल ट्रस्ट से प्रकाशित शहादत का रास्ता से लिया है। 011-23234190)

Saturday, 13 September 2014

भारतीय मुसलमान !

The rich legacy of Nizams




DC CORRESPONDENT | June 01, 2014, 00.06 am IST
Mir Osman Ali Khan receives Prime Minister Lal Bahadur Shastri at Begumpet airport. Responding to Shastri’s appeal, the Nizam donated 5000 kg of gold to the National Defence Fund
Mir Osman Ali Khan receives Prime Minister Lal Bahadur Shastri at Begumpet airport. Responding to Shastri’s appeal, the Nizam donated 5000 kg of gold to the National Defence Fund

Thursday, 11 September 2014

बाबरी मस्जिद

फिर तेरी कहानी याद आती है ! तुम्हारी खूबसूरती के किस्से आज भी , अखबार के किसी पुराने टुकड़े में मिल जाएंगे ! मुगलो के कला व स्थापत्य के प्रेम ने ,तुममे  वो रंग भर दिया की ,तुम्हारी खूबसूरती का बखान तो लॉर्ड विलियम बेंटिक (1828–1833) के वास्तुकार ,ग्राहम पिकफोर्ड ने भी  अपनी पुस्तक "हिस्टोरिक स्ट्रक्चर्स ऑफ़ अवध"  में किया ! तूने सबको अपनाया , सबको अपना माना , सबके प्रेम को खुले दिल से स्वीकार्य भी किया ! तुम्हारे भीतर कई सम्प्रदायों का मिलन होता था ! तुम्हारे भीतर कोई इबादत करता था तो कोई सच्ची आराधना में मशगूल था ! शायद तुम्हारे इसी प्यार ने गंगा जमुनी तहज़ीब की एक मिसाल  कायम की !
                             एक ऐसी मिसाल जिसे आज तक भुलाया न जा सका , तुझे मिटाने की कोशिशे तो बहुत हुई पर तुझे आज भी हमारे दिल से मिटाया न जा सका ! तुझ पर ज़ुल्म ढाये गये , तेरे अस्तित्व पर सवाल खड़े किये गए ! तुझ पर नेताओं ने अपनी राजनीतिक  रोटियां  सेंकी ! तेरे प्यार और लोगो की आस्थाओं का मज़ाक बनाया गया ! तेरा और उनका (जिन्होंने तुझे लूटा)  सबका केवल इस्तेमाल किया गया ! जब तुझे क़त्ल करने की कोशिशें की जा रही थी तब भी तू किसी माँ की तरह खड़ी सब सह रही थी ! हम तो तुम्हारी याद में काला दिवस (BLACK DAY ) मना लेते हैं, पर कभी कभी सोचता हूँ कि तुम उस दिन को कैसे काटती होगी ! कैसे उन सब  ज़हरीली यादो के साथ  जीती होगी ! कैसे आज भी तुम अपने अस्तित्व के लिए लड़ती होगी ! तुम्हे कितनी तकलीफ होती होगी जब तुम उन  खूनियो को अपने नापाक मंसूबो में कामयाब होते देखती होगी ! उन खूनियो ने आज तुम्हारी लाश पर अपनी कामयाबी की इमारत खड़ी कर ली है !
            और तुम्हे बदले में क्या मिला , न तुम राम की हो पायी न रहीम की ! बस आज तुम्हारा नाम एक विवादास्पद स्थल के रूप में लिया जाता है ! एक ऐसा स्थल जिसके कारण हज़ारों लोगो को अपनी जान गंवानी पड़ी ! ऐसा स्थल जो आज भी तमाशबीनों के लिये मनोरंजन का एक केंद्र है ! जानता हूँ कि अपनी इन अनैतिक परिभाषाओं को सुनकर तुम्हारा दिल ज़रूर रो देता होगा !  लेकिन तुम फ़िक्र मत करो आज भी तुम्हे हर कोई हासिल कर लेना चाहता है पर उसे तुम्हारे स्वास्थ (हालात) कि नहीं बल्कि अपने स्वार्थ की चिंता है ! 
                                                                                                             - सलमान अली




Saturday, 6 September 2014

ये कैसा हिंदुस्तान ?

हम कहाँ रहते हैं भारत, इंडिया या फिर हिंदुस्तान में ! क्या वाक़ई ये मुद्दा इतना गंभीर हैं जिस पर चिंतन करने की ज़रुरत है ! हम भारत कहें , इंडिया कहें या फिर हिन्द्दुस्तान बोले हमारे दिमाग में एक ही चित्र उभर कर आता है वो है अपनी मातृ भूमि जो की हमारी कर्म भूमि भी है ! पर पता नहीं कुछ लोगों को एक बात समझ में क्यों नहीं आती कि ज़रूरी नहीं की जो जिसकी मातृ भूमि हो, कर्म भूमि हो वो ही उसकी धर्म भूमि भी हो ! शायद हमारे संविधान में ऐसे किसी भी बात का ज़िक्र नही है ! पहले ये सोचिये कि जिस शब्द को लेकर इतनी बेहेस हो रही है वो शब्द कि उत्तपत्ति कहाँ से हुई और किसने कि ! वैसे समझ में नहीं आता कि जो लोग मुसलमानो से इतनी नफरत करते है वो उनके ही दिए हुए शब्द को सुन कर कैसे अपनी छाती चौड़ी कर लेते हैं !
मैं हिंदुस्तानी हूँ या मै हिंदी हूँ ! अरे नहीं यार मै तो हिन्दू हूँ ! लेकिन जब मोहन प्यारे ने कहा की जैसे इंग्लैंड इंग्लिश का है, जर्मनी जर्मन का है तो इसी हिसाब से हिंदुस्तान के रहने वाले हिन्दू हुए ! बेचारे मोहन प्यारे किसी बच्चे की तरह शब्दों से खेलने की कोशिश करते हैं और अपने आपको इसका महारथी समझते हैं ! अरे बावले जब इंग्लैंड इंग्लिश का है ,जर्मनी जर्मन का है तो हिंदुस्तान हिंदी का हुआ न ! हम गर्व से कहते हैं की हम हिंदी हैं ! इसीलिए तो अल्लामा इक़बाल साहब ने कहा था कि
" हिंदी हैं हम वतन हैं,हिन्दोसितां हमारा " !
मुसलमानो से इतनी नफरत करने वाले जनसंघियों का हिन्दू शब्द से मोहब्बत देखते ही बनती है ! हिन्दू शब्द का इतिहास क्या है ? ये उन्ही ईरानी(मुसलमान) द्वारा दिया गया शब्द है जिसकी पूरी कौम से ये नफरत करते हैं ! " गर्व से कहो कि हम हिन्दू हैं " इसकी जगह ये कहना ज्यादा बेहतर और जायज़ होगा कि "गर्व से कहो कि हम सनातनी हैं " !
---------------------------------------------------------------------सलमान अली-----------------------------------------------------

बीते लम्हें !

लम्हें जब बीत जाते हैं तो यही लम्हें हमारी यादें बन जाते हैं ! इन्ही यादों की चादर में कुछ यादें ऐसी भी होती हैं जो किसी ख्वाब से कम नहीं होती ! वो ख्वाब जो पूरे हो चुके हैं........ फिर भी हम सोचते हैं कि काश वो लम्हां जो अब ख्वाब बन चुका है काश फिर से वापस आ जाता ! ऐसे खूबसूरत लम्हें सबकी ज़िन्दगी में आते ज़रूर हैं बस ज़रुरत है उन लम्हों को पहचानने की और उन्हें इस तरह जीने की , कि बाद में जब वो लम्हां बीत जाएं तो गम न रह जाये कि काश वो लम्हां फिर से आ जाता तो कितना कुछ कर लेते ! कॉलेज हो या हॉस्टल ये सारे वो लम्हें हैं जो कि चंद पलों के ख्वाब होते है इसलिए इन्हे इस तरह से जी लीजिये कि कल को कोई शिकायत न रह जाये अपने आप से ! ज़िन्दगी को शिकायतों के साथ नहीं बल्कि खूबसूरत ख़्वाबों के साथ बिताइये !
ज़ाहिद ने मेरा हौसले ईमान नहीं देखा,
रुख पर तेरी ज़ुल्फों को परेशान नहीं देखा...
आये थे सभी तरह के जलवे मेरे आगे...
मैंने मगर ए दीदाए हैरान नहीं देखा ...
----------------------------------------------------------------------------सलमान अली--------------------------------------

Raanjhanaa

मान लो एक किसान के घर चार बच्चे हैं और घर में बनी पड़ी है एक किलो खीर , पर मैं पूछ रहा हूँ कि साला दो किलोग्राम खीर क्यों नहीं बन सकती ! फिर ये कहेंगे कि सर Raw Material तो सर एक ही किलो का है ! मेरा मानना ये है कि एक किलो तो मिनिस्टर साहब के घर पर भी पड़ा हुआ है ! इसिलिए मैं ये बात कहता हूँ कि जब गरीब के पास खाने को कुछ नहीं होगा न फिर वो अमीर को खायेगा ! ------------ _

नायक !

नायक मूवी देख रहा था वैसे पहले भी कई बार देखी है लेकिन जब भी आती है मंन करता है कि एक बार और देख ली जाये ! अब हमारी फितरत ही ऐसी हो गई है कि जो काम हम रियल लाइफ में नहीं कर पाते उसे रील लाइफ में ही देख कर खुश हो जाते है ! अब इतनी अच्छी राजनीति या इतनी अच्छी हॉकी रियल लाइफ में तो देखने को मिलती नहीं तो नायक या चक दे इंडिया जैसी मूवीज ही देख कर खुश हो लेते हैं ! मूवी देखने के बाद एक अलग सी संतुष्टि मिलती है और मन करता है कि अगर मुझे मौका मिला होता तो मैं भी देश के लिए क्या क्या कर देता पर अब ये सब हमारी पहुंच के बाहर है !
हाँ एक बात और सोच रहा था कि क्यों न संसद के पहले सत्र में तमाम मंत्रियो और सांसदों को नायक जैसी मूवी ही दिखा दी जाये शायद उनको भी कुछ देश के लिए अपने फ़र्ज़ कि याद आ जाये वरना पीछे बैठ कर तो मोबाइल में पिक्चरिया तो देखते ही रहते है !
---------------------------- सलमान अली -----------------------------------------------------

यहाँ ज़बान बिकती है !

श्रीमती किरण बेदी जी से ज्यादा अपनी बात से पलटने वाला व्यक्ति बड़ी मुश्किल से मिलता है ! अभी इनका एक पुराना भाषण देख रहा था जिसमे उन्होंने अन्ना हज़ारे जी के मंच पर प्रतिज्ञा ली थी कि वो केजरीवाल के साथ कभी नहीं जाएंगी क्यूंकि वो राजनीति में नहीं आना चाहती !
अब कोई इन मोहतरमा से पूछे कि क्या बीजेपी किसी समाज कल्याण संस्था का नाम है !
----------------------------------सलमान-----------------------------

Monday, 1 September 2014

पेड़ की जड़ें !

पेड़ की जड़े उतनी ही मजबूत होती हॆ जितना कि पेड़ खुद
मजबूत हो । पेड़ चाहकर भी अपनी जड़ो को मजबूत नहीं कर
सकता । वॆसे भी कमजोर जड़ वाले पेड़
को हवा का हलका झोका भी तोड़ मोड़ देता हॆ ।
समझदारी इसी मे हॆ कि पेड़ इस सच को खुद ही समझ ले
क्योंकि प्रकृति के विरोध मे आँखे मूँद लेना समझदारी नहीं हॆ

-------—-----------सलमान------ ------------

मौत !

इस दुनिया कि सबसे खूबसूरत चीज मौत हॆ ।
ज़िदगी तो ज़ख्मों को कुरेदती हॆ लेकिन मौत कभी न खत्म
होने वाला शुक़ून दे जाती हॆ ।
--------------सलमान अली-------

हल्ला बोल !

किसी महापुरुष ने कहा था की इंसान की पहचान उनके
प्रशंषको से ही हो जाती है ! महात्मा गांधी से बड़ी जनसभाएं
शायद ही भारत के इतिहास में कभी हुई हो लेकिन शायद
ही कभी किसी ने सुना या पढ़ा होगा की उनकी जनसभा में
पहुंचे किसी भी व्यक्ति के साथ उनके प्रशंषको ने
बदतमीज़ी की हो !
दूसरी तरफ हैं मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम भक्त और हमारे
प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ! अगर
किसी को अपनी बेइज़्ज़ती करवानी हो तो बस इनके साथ मंच
साझा कर लीजिये बाकी का काम इनके प्रशंषको की भीड़ कर
देगी ! मज़े की बात तो ये है कि इस दौरान ये महोदय
किसी तानाशाह की तरह अपने मुरीदो के
द्वारा की जा रही ज़ाहिलियत का मुस्कुराकर समर्थन भी कर
देंगे ! बस मैं तो मोदी जी से इतनी ही विनती करूंगा कि इनमे
से दो चार को अपना प्रवक्ता भी बना ही लीजिये
क्यूंकि आपके प्रवक्ताओं कि एक ही खाशियत है और उसे
हम देशी भाषा में बकचोदी करना कहते हैं !
मोदी जी आपसे एक और निवेदन था कि इनमे से दो चार
को अपने साथ अमेरिका भी ले ही जाइयेगा क्यूंकि जब आप
देश के बाहर जाते हो तो आपके अंदर आत्मविशवास
कि कमी साफ़ झलकती है तो हो सकता हैं इनके
मोदी मोदी.... के नारे से आप में कुछ आत्मविश्वास ही लौट
आये ! वैसे मज़ाक कर रहा हूँ गलती से भी इन
नमूनो को वहाँ मत ले जाना वरना वहाँ जाकर
आपका तो सिर्फ आत्मविश्वास ही मुश्किल में पड़ेगा पर इन
बेचारों कि तो ज़िन्दगी ही मुश्किल में पड़ जाएगी !
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सलमान अली---------------------------

Thursday, 28 August 2014

Z+ सुरक्षा ?

कितनी अजीब परिस्थिति है हमारे भारतवर्ष की जिस देश में एक लाख (1,00,000) लोगो पर मात्र 130  पुलिस वाले हों ! उस देश में एक दंगा आरोपित की सुरक्षा के लिए 36 NSG कमांडो की दीवाल ! वाक़ई ये दुखद है !
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अच्छे दिन आएंगे ?

अच्छे दिन आएंगे ! इस नारे का खुमार मतदाताओं पर कुछ इस कदर चढ़ा कि बीजेपी ने वो ऐतिहासिक जीत का स्वाद चखा जिसकी वो खुद भी उम्मीद नहीं कर रही थी ! अच्छे दिन मतलब क्या ! क्या मोदी ये कह रहे थे कि मेरे आते ही सुखा पड़ेगा , रेल किरायों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी कि जाएगी , पेट्रोल/डीजल के दाम आसमान छुएंगे और अब टमाटर आपको देख कर नहीं बल्कि आप टमाटर के दाम को देखकर लाल हो जाएंगे ....दरअसल मोदी कुछ भी कहना चाह रहे हों पर जनता ने उनकी बातो का मतलब कुछ और ही समझा था ! वो बावली जनता समझ बैठी कि अच्छे दिनों के आने का मतलब मंहगाई का कम हो जाना और गरीबी का दूर हो जाना था ! वैसे नारो कि वजह से जीत का मज़ा चखने वाली बीजेपी अकेली पार्टी नहीं है , लगभग हर चुनाव में इनका इस्तेमाल किया जाता है ! अच्छे दिन आएंगे ! ये नारा किसी नारे का  प्रतिबिम्ब है ! जी हाँ याद है 1971 का लोकसभा चुनाव जिसमे अबकी बार करारी हार का सामना करने वाली पार्टी कांग्रेस ने  भी कुछ इसी तरह कि जीत का स्वाद चखा था ! वो नारा स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने दिया था कि " वो कहते हैं कि इंदिरा हटाओ और मै कहती हूँ कि गरीबी हटाओ " ! मैंने " गरीबी हटाओ " और " अच्छे दिन आएंगे " के नारे को एक दूसरे का प्रतिबिम्ब इस लिए कहा क्यूंकि जनता के लिए दोनों का मतलब एक ही है ! गरीबी के जाल से निकलना ही उनके लिए सबसे अच्छे दिनों कि शुरुआत है ! 
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