Saturday, 6 September 2014

ये कैसा हिंदुस्तान ?

हम कहाँ रहते हैं भारत, इंडिया या फिर हिंदुस्तान में ! क्या वाक़ई ये मुद्दा इतना गंभीर हैं जिस पर चिंतन करने की ज़रुरत है ! हम भारत कहें , इंडिया कहें या फिर हिन्द्दुस्तान बोले हमारे दिमाग में एक ही चित्र उभर कर आता है वो है अपनी मातृ भूमि जो की हमारी कर्म भूमि भी है ! पर पता नहीं कुछ लोगों को एक बात समझ में क्यों नहीं आती कि ज़रूरी नहीं की जो जिसकी मातृ भूमि हो, कर्म भूमि हो वो ही उसकी धर्म भूमि भी हो ! शायद हमारे संविधान में ऐसे किसी भी बात का ज़िक्र नही है ! पहले ये सोचिये कि जिस शब्द को लेकर इतनी बेहेस हो रही है वो शब्द कि उत्तपत्ति कहाँ से हुई और किसने कि ! वैसे समझ में नहीं आता कि जो लोग मुसलमानो से इतनी नफरत करते है वो उनके ही दिए हुए शब्द को सुन कर कैसे अपनी छाती चौड़ी कर लेते हैं !
मैं हिंदुस्तानी हूँ या मै हिंदी हूँ ! अरे नहीं यार मै तो हिन्दू हूँ ! लेकिन जब मोहन प्यारे ने कहा की जैसे इंग्लैंड इंग्लिश का है, जर्मनी जर्मन का है तो इसी हिसाब से हिंदुस्तान के रहने वाले हिन्दू हुए ! बेचारे मोहन प्यारे किसी बच्चे की तरह शब्दों से खेलने की कोशिश करते हैं और अपने आपको इसका महारथी समझते हैं ! अरे बावले जब इंग्लैंड इंग्लिश का है ,जर्मनी जर्मन का है तो हिंदुस्तान हिंदी का हुआ न ! हम गर्व से कहते हैं की हम हिंदी हैं ! इसीलिए तो अल्लामा इक़बाल साहब ने कहा था कि
" हिंदी हैं हम वतन हैं,हिन्दोसितां हमारा " !
मुसलमानो से इतनी नफरत करने वाले जनसंघियों का हिन्दू शब्द से मोहब्बत देखते ही बनती है ! हिन्दू शब्द का इतिहास क्या है ? ये उन्ही ईरानी(मुसलमान) द्वारा दिया गया शब्द है जिसकी पूरी कौम से ये नफरत करते हैं ! " गर्व से कहो कि हम हिन्दू हैं " इसकी जगह ये कहना ज्यादा बेहतर और जायज़ होगा कि "गर्व से कहो कि हम सनातनी हैं " !
---------------------------------------------------------------------सलमान अली-----------------------------------------------------

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