Saturday, 6 September 2014

बीते लम्हें !

लम्हें जब बीत जाते हैं तो यही लम्हें हमारी यादें बन जाते हैं ! इन्ही यादों की चादर में कुछ यादें ऐसी भी होती हैं जो किसी ख्वाब से कम नहीं होती ! वो ख्वाब जो पूरे हो चुके हैं........ फिर भी हम सोचते हैं कि काश वो लम्हां जो अब ख्वाब बन चुका है काश फिर से वापस आ जाता ! ऐसे खूबसूरत लम्हें सबकी ज़िन्दगी में आते ज़रूर हैं बस ज़रुरत है उन लम्हों को पहचानने की और उन्हें इस तरह जीने की , कि बाद में जब वो लम्हां बीत जाएं तो गम न रह जाये कि काश वो लम्हां फिर से आ जाता तो कितना कुछ कर लेते ! कॉलेज हो या हॉस्टल ये सारे वो लम्हें हैं जो कि चंद पलों के ख्वाब होते है इसलिए इन्हे इस तरह से जी लीजिये कि कल को कोई शिकायत न रह जाये अपने आप से ! ज़िन्दगी को शिकायतों के साथ नहीं बल्कि खूबसूरत ख़्वाबों के साथ बिताइये !
ज़ाहिद ने मेरा हौसले ईमान नहीं देखा,
रुख पर तेरी ज़ुल्फों को परेशान नहीं देखा...
आये थे सभी तरह के जलवे मेरे आगे...
मैंने मगर ए दीदाए हैरान नहीं देखा ...
----------------------------------------------------------------------------सलमान अली--------------------------------------

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